इतवाउत्तर प्रदेशगोंडागोरखपुरबस्तीलखनऊसिद्धार्थनगर 

बस्ती में ‘मरीज माफिया’ का आतंक: सरकारी अस्पताल के बाहर बिछा है निजी लूट का जाल!

सफेदपोश गिद्ध: महिला अस्पताल की गली में तीमारदारों की मजबूरी नोंच रहे अवैध सेंटर!

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती: महिला अस्पताल की गली में ‘सफेदपोश गिद्धों’ का डेरा, तीमारदारों की मजबूरी पर पल रहा है ‘मरीज माफिया’

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  • खाकी की नाक के नीचे ‘मौत का सौदा’: दुकानें अवैध, मशीनें अवैध और रसूख के दम पर कार्रवाई को चुनौती!अस्पताल कम, ‘ट्रैप’ ज्यादा: हरे पर्दे के पीछे चल रहा है कमीशनखोरी का काला खेल!
  • साहब! आपकी 112 खड़ी रही और माफिया मरीजों को हांकते रहे, क्या यही है सुशासन? जांच टीम को देख चूहे बने संचालक: बिना बोर्ड वाली दुकानों में कौन लिख रहा है अस्पताल के पर्चे?
  • बस्ती शर्मसार: महिला अस्पताल की गली बनी ‘कमीशनखोरी का अड्डा’। सावधान! महिला अस्पताल के बाहर सक्रिय हैं ‘दलाल’, सीएमओ की जांच में खुली पोल।
  • गुंडागर्दी और गंदा धंधा: कवरेज पर धमकी, अवैध सेंटरों पर कब चलेगा प्रशासन का डंडा?

बस्ती। सरकारी अस्पतालों की दहलीज पर विश्वास लेकर आने वाले गरीब मरीजों के लिए जिला महिला अस्पताल के बाहर की गली ‘नरक का द्वार’ बन चुकी है। यहाँ सेवा के नाम पर ‘सफेदपोश गिद्ध’ सक्रिय हैं, जो तीमारदारों की लाचारी और अज्ञानता को नोंचकर अपने निजी अस्पतालों और अवैध जांच केंद्रों की तिजोरियां भर रहे हैं। सोमवार को हुए खुलासे ने स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन की मिलीभगत पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

दुकानों में चल रहा ‘मौत का सौदा’, हरा पर्दा और अंदर अवैध धंधा

दोपहर करीब 12 बजे की हकीकत चौंकाने वाली थी। एक बिना नाम-बोर्ड वाली दुकान के बाहर लटका हरा पर्दा किसी राज को छुपाने की कोशिश कर रहा था। अंदर प्रवेश करते ही सेवा का मुखौटा उतर गया। वहां भारी मात्रा में ‘श्रीराम मेडिकल एंड मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल’ के लेटर पैड बरामद हुए। सवाल यह है कि एक गुमनाम दुकान में किसी अस्पताल के लेटर पैड क्या कर रहे थे? क्या ये दुकानें अस्पताल नहीं, बल्कि मरीजों को फंसाने के ‘ट्रैप’ हैं?

जांच टीम को देखते ही मची भगदड़, चूहों की तरह भागे संचालक

गली में कदम-कदम पर अवैध अल्ट्रासाउंड मशीनें और पैथोलॉजी सेंटर मौत का जाल बिछाए बैठे हैं। जैसे ही जांच की आहट हुई, इन ‘मरीज माफियाओं’ के चेहरों से हवाइयां उड़ने लगीं। आनन-फानन में मरीजों को बाहर धकेला गया और लैब संचालक चूहों की तरह बिलों में दुबक गए। हैरानी की बात यह है कि जहां डॉक्टर और डिग्री का पता नहीं, वहां हाई-टेक मशीनें धड़ल्ले से चल रही हैं।

सत्ता की हनक और ‘खाकी’ की खामोशी पर सवाल

जांच के दौरान एक युवक ने तथाकथित ‘संगठन के जिलाध्यक्ष’ का चोला ओढ़कर कैमरे और कलम को दबाने की कोशिश की। खुल्लम-खुल्ला धमकी दी गई, जो खुफिया कैमरे में कैद है। सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि कुछ ही दूरी पर डायल 112 की गाड़ी खड़ी थी, लेकिन पुलिस की नाक के नीचे यह अवैध साम्राज्य बेखौफ फल-फूल रहा है। क्या इन माफियाओं को प्रशासन का संरक्षण प्राप्त है?

सीएमओ का आश्वासन: जांच होगी या खानापूर्ति?

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ डॉ. राजीव निगम ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि अवैध गतिविधियां पाए जाने पर सीलिंग और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सवाल वही है— क्या यह कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी या इन ‘मरीज माफियाओं’ की जड़ें सच में खोदी जाएंगी?

बड़ा सवाल: क्या जिला प्रशासन इन माफियाओं के खिलाफ ‘बुलडोजर’ जैसी सख्ती दिखाएगा, जो गरीब जनता की जान और जेब दोनों से खिलवाड़ कर रहे हैं?

Back to top button
error: Content is protected !!